कालाजार की तलाश में हर दरवाजे पर आशा की दस्तक

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  1. कालाजार की तलाश में हर दरवाजे पर आशा की दस्तक

    – घर-घर जाकर हो रही है कालाजार मरीजों की खोज
    – बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार, लक्षण दिखाई देने पर करवाएं जांच
    – जिले के 14 प्रखंडों में 319 आशाओं को दी गई जिम्मेदारी
    – जिले के 278 संभावित गावों के 85753 घरों में होगी कालाजार के मरीजों की खोज

पूर्णियाँ, 29 अगस्त

कालाजार के मरीजों की तलाश में हर घर के दरवाजे पर आशा की दस्तक हो रही है। लक्ष्य है 2020 तक कालाजार से समाज को मुक्त करने का। इस लक्ष्य पर काम करते हुए आशा जिले में घर-घर जाकर पड़ताल कर रहे हैं। इसके लिए जिले के सभी आशाओं और आशा फैसिलेटर को पारंगत किया गया है।

पहचान और लक्षण की हो रही बात:
जिले में सभी स्तरों पर कालाजार की खोज से एक दिन पूर्व माइकिंग द्वारा प्रचार-प्रसार भी करवाया जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों व आम लोगों को भी कालाजार के पहचान और लक्षण की जानकारी आशा कर्मियों की तरफ से दी जा रही है। ऐसा इसलिए कि लोग जागरूक हो जाएं और पूर्व से ही सतर्क रहें। खतरा दिखने पर अविलंब स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर जांच करा सके।

 

विशेष मिशन में 319 आशा कार्यकर्ता:
कालाजार के मरीज़ों की खोज के लिए पूरे जिले के सभी 14 प्रखंडों में कुल 319 आशाओं को लगाया गया है। आशाओं के पर्यवेक्षण के लिए कुल 120 आशा फैसिलेटर को भी प्रशिक्षित किया गया है। इन आशाओं द्वारा जिले के 278 संभावित गांवों के कुल 85753 घरों में जाकर कालाजार के मरीजों की खोज की जाएगी। कालाजार के लिए आशाओं द्वारा घर-घर होने वाले सर्वे और कालाजार सम्बंधित जानकारी देने के लिए प्रखंडों में विभाग द्वारा प्रचार अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रचार वाहन से माइकिंग द्वारा लोगों को कालाजार से बचाव के लिए जागरूक करवाया जा रहा है।

इन व्यक्तियों की होगी जांच :
रोगी खोज के दौरान 15 अथवा 15 दिनों से अधिक दिनों से बुखार से पीड़ित व्यक्ति जिन्होंने बुखार के दौरान मलेरिया की दवा अथवा एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन किया हो और उसके बाद भी बुखार ठीक न हुआ हो साथ ही उन्हें भूख की कमी व पेट का बड़ा होना जैसे लक्षण दिखाई दें उन व्यक्तियों को RK-35 किट से जांच करवाने के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा। क्षेत्र में यदि किसी व्यक्ति ने पूर्व में कालाजार का इलाज करवाया हो फिर भी उनमें बुखार के साथ कालाजार के अन्य लक्षण पाए जा रहे हों तो ऐसे व्यक्तियों को बोन मैरो या स्प्लीन एस्पिरेशन जांच करवाने के लिए सदर अस्पताल रेफर करवाया जाएगा।

कालाजार और लक्षण :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रक पदाधिकारी डॉ. आर. पी. मंडल ने बताया कालाजार धीरे-धीरे विकसित होने वाला बीमारी है जो मादा फ्लैबोटामस अर्जेंटाइप्स (बालू मक्खी) के काटने से होता है. मक्खी के काटने के 15 से 20 दिन बाद व्यक्ति में कालाजार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। उन्हें बार-बार बुखार आने लगता है. इसके साथ-साथ भूख में कमी, वजन का घटना, थकान महसूस होना, पेट का बढ़ जाना आदि इसके लक्षण के रूप में दिखाई देने लगते हैं। ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीक के अस्पताल में जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए। ठीक होने के बाद भी कुछ व्यक्ति के शरीर पर चकता या दाग होने लगता है। ऐसे व्यक्तियों को भी अस्पताल जाकर अपनी जांच करा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में कुल 41 व्यक्ति कालाजार से पीड़ित हैं जबकि 15 ऐसे व्यक्ति पाए गए हैं जिन्हें पूर्व में कालाजार था। आशाओं द्वारा ऐसे संक्रमित व्यक्तियों के घर के चारो तरफ के घरों पर विशेष रूप से मरीजों की खोज के लिए निर्देश दिए गए हैं।

मरीजों को सरकार से आर्थिक सहायता :
कालाजार से पीड़ित रोगी को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में बीमार व्यक्ति को राज्य सरकार द्वारा 6600 रुपए और केंद्र सरकार द्वारा 500 रुपए दिए जाते हैं। यह राशि कालाजार संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के समय में दिया जाता है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार संक्रमित रोगी को केंद्र सरकार की तरफ से 4000 रुपए दिए जाते हैं।

SANJAY KUMAR OJHA

Journalist

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