छपरा:दिन में बच्चे को पढ़ाते हैं और रात में बनाते हैं मां सरस्वती की मूर्ति

कुन्दन कुमार,गड़खा।

मन में सच्ची मेहनत और लगन हो तो किसी भी कार्य को करने में समय बाधा नहीं डाल सकती दृढय संकल्प के आगे पूरी कायनात झुक जाती है यह कहानी चरितार्थ हो रही है। दिघवारा के नवसृजित प्राथमिक मध्य विद्यालय मिल्की के स्कूल के शिक्षक मिंटू कुमार पर।मिंटू कुमार दिघवारा के अंबेडकर चौक निवासी श्रीराम जी पंडित के पुत्र हैं। 19 फरवरी 2014 से नवसृजित प्राथमिक स्कूल मिल्की में शिक्षक के पद पर भी कार्यरत हैं। उसके बाद भी 5 वर्षों से दिन में बच्चे को पढ़ाते हैं और रात्रि में घर पर मूर्ति को गढ़ने का काम करते हैं। इस वर्ष भी डेढ़ माह में अब तक 50 से ज्यादा मूर्तियां बना डाली है। रविवार को दिन में भी मूर्तियां बनाते हैं ।

10 वर्ष की उम्र में बनाई थी पहली मूर्ति

अपने पिता श्री रामजी पंडित और दादा को मूर्ति बनाते देख मिंटू कुमार पहली बार 1998 में खेल-खेल में ही एक सरस्वती माता की मूर्ति बना डाली, मूर्ति इतनी खूबसूरत थी की आस पास के लोग उस मूर्ति को देखकर उसे ही खरीदने की डिमांड करने लगे। उसके बाद फिर क्या था? 20 वर्षों से आज तक मूर्ति बना रहे हैं। 5 वर्ष पहले सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी भी लग गई। जिसके बाद भी रात्रि में जागकर मूर्ति जरूर बनाते हैं।

मां सरस्वती की कृपा से लगी नौकरी

कुम्हार जाति से विलोम करने वाले मन्टू मां सरस्वती के बहुत बड़े भक्त हैं, माँ की प्रति अटूट आस्था भी है। उनकी मानना है कि मां सरस्वती की कृपा से ही उन्हें सरकारी शिक्षक की नौकरी मिली है, और घर के सभी सदस्य आज खुशहाल हैं। मिंटू के यहां छोटे-छोटे बच्चे भी मूर्ति बनाने में उनका सहयोग कर रहे हैं।मिंटु नि:शुल्क कोचिंग भी पढ़ाते हैं।घर के अलावा खेती के लिए भूमि नही है, खुद तकलीफ से अपनी पठाई पूरी किए है।

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