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*मारवाड़ी (राजस्थानी) भाषा को संवैधानिक भाषा का दर्जा मिलने से प्रफुल्लित हुआ राजस्थानी(मारवाड़ी) समाज- श्याम बिहारी अग्रवाल*

सारण:- केन्द्र सरकार द्वारा मारवाड़ी (राजस्थानी ) भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कर इसे संवैधानिक भाषा का दर्जा दिए जाने पर देशभर के राजस्थानी (मारवाड़ी) समाज में हर्ष व्याप्त है। मारवाड़ी भाषा अत्यंत प्राचीन काल से देश में प्रचलित है किन्तु अभी तक इसे संवैधानिक भाषा का दर्जा नहीं दिया गया था। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक भाषा का दर्जा दिए जाने पर मारवाड़ी समाज के हर शख्स का हृदय प्रफुल्लित हो गया है। केन्द्र सरकार के इस निर्णय पर बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन छपरा शाखा के संगठन मंत्री सह प्रवक्ता श्याम बिहारी अग्रवाल ने इस निर्णय पर हर्ष व्यक्त किया है। श्याम बिहारी अग्रवाल ने बताया राजस्थानी भाषा भारत के राजस्थान प्रांत व मालवा क्षेत्र तथा पाकिस्तान व नेपाल के कुछ भागों में करोड़ो लोगों द्वारा बोली जाती है। इस बोली का इतिहास हिन्दी से पुराना है। इसमें बाचिक परम्परा व आाद में लिखित साहित्य विपुल मात्रा में उपलब्ध है। इसमें विपुल मात्रा में लोकगीत, संगीत, नृत्य, नाटक कथा, कहानी व सिनेमा आदि का समावेश है।बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की छपरा शाखा के अध्यक्ष हरि कृष्ण चाँदगोठिया, सचिव विजय कुमार चौधरी, संगठन मंत्री सह प्रवक्ता श्याम बिहारी अग्रवाल, प्रमंडलीय मंत्री प्रहलाद कुमार सोनी, कोषाध्यक्ष गोविन्द लाठ एवं अन्य पदाधिकारियों ने संविधान की 8वीं अनुसूची में रास्थानी भाषा को शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार का अभिनंदन किया है। श्याम बिहारी अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले से समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस फैसले से समुचे विश्व को राजस्थानी भाषा और संस्कृति की जानकारी उपलब्ध होने में मदद मिलेगी। केन्द्र सरकार के इस निर्णय से राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा को सही सम्मान मिला हैं।

SANJAY KUMAR OJHA

Journalist

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