दिल्ली:गोली मारो सालों को देश के गद्दारों को,इंडिया गेट पर लोगों ने भड़ी हुंकार

इंडिया गेट से न्यूज स्पेशल के लिए संजय कुमार ओझा आन द स्पाट

गोली मारो सालों को देश के गद्दारों को,बंद करो स्वच्छता अभियान पाकिस्तान को कर दो साफ, सुन ले बेटा पाकिस्तान,बाप तुम्हारा हिन्दुस्तान।बंदे मातरम,भारत माता की जय,हिन्दुस्तान जिंदाबाद,पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से आज दिल्ली का इंडिया गेट,राजपथ गुंज रहा है।रविवार का दिन है दोपहर के तीन बज रहे हैं।मै भी देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध इंडिया गेट पर मौजूद हूँ।हजारों की भीड़ इंडिया गेट के आसपास दीख रहीं है।सभी लोग जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचे है।देखते ही देखते शाम के पांच बज गए और हजारों की भीड़ कब लाखों में बदल गई पता ही नहीं चला।ये भीड़ बीन बुलाई भीड़ थी।ये भीड़ इंडिया गेट का दिदार करने नहीं पहुंची थी,ये भीड़ इंडिया गेट पर पिकनिक मनाने नहीं आइ थी।ये भीड़ किसी नेता का भाषण सुनने के लिए भी नहीं उमड़ी थी।ये भीड़ पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ी थी।जहाँ लोगों के आंखों में गम था गुस्सा था।भीड़ में शामिल लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा और कैंडल थामा हुआ था।लोगों के हाथों में तिरंगा देख पहली नजर में तो ये लगा की आज कही स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस तो नही है,लेकिन ऐसा कुछ भी तो नहीं है आज।ये शहीदों के प्रति देश के लोगों के दिलों में उमड़ा श्रद्धा के भाव है।जो जन सैलाब के रूप इंडिया गेट पर उमड़ा है।ये जन सैलाब सरकार को ये अहसास करा रही है कि देश की तमाम विपक्षी पार्टीयां सरकार के साथ है तो देश की जनता भी सरकार के साथ है।लोग एक तरफ आक्रोश मार्च निकाल रहे थे तो वही जैसे शाम होती गई सैनिकों के आत्मा के शांति के लिए लोगों ने कैंडल जला कैंडल मार्च किया।20190217_180847-picsayजैसे जैसे शाम गहराती गई इंडिया गेट पर लोगों का जन सैलाब बढ़ता गया।पुरा इंडिया गेट कैंडल की टिमटिमाती रौशनी से नहा उठा।टिमटिमाती कैंडले भी ऐसा लग रहा था कि शहीदों के शहादत में आंसू बहा रही हो।लोग अपने हाथों में कैंडल थामें हुए हुए आगे बढ़ते रहे और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी होती रही।गर्म कैंडल की मोम पिघल कर उंगलियों में जमती रही, लेकिन,लेकिन लोगों को अपनी उंगलियों को जल जाने का न अहसास था न परवाह ।लोगों की बस अब यही मांग थी कि अब बहुत हुआ,अब सब्र नहीं होता,ये सब्र की घड़ी नहीं है बस फैसले की घड़ी है,बस ये फैसले की घड़ी है।जय हिंद……।

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