भाजपा ने सेंगर को पार्टी से निकाला

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भाजपा ने सेंगर को पार्टी से निकाला

न्यूज स्पेशल ब्यूरो, लखनऊ: भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को दिल्ली तलब किया गया था। इसी के बाद लग रहा था कि सेंगर पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। उन्नाव के माखी गांव में दुष्कर्म के आरोप में कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल सीतापुर जेल में बंद हैं। इस मामले के साथ ही अब रायबरेली में पीड़िता के सड़क दुर्घटना में घायल होने की सीबीआइ जांच हो रही है।

रायबरेली में उन्नाव के माखी गांव की दुष्कर्म पीड़िता के दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मामला तूल पकड़ने पर भाजपा बैकफुट पर आ गई थी। भाजपा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी मंगलवार को कहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर को भाजपा से लंबे समय से निलंबित कर दिया गया है। सीतापुर जेल में बंद कुलदीप सिंह सेंगर को प्रयागराज या फतेहगढ़ जेल भेजने की भी तैयारी की जा रही है।

माना जा रहा था कि उन्नाव के माखी गांव की दुष्कर्म पीड़िता की रायबरेली में सड़क दुर्घटना के बाद चौतरफा घिरी भाजपा बड़ी कार्रवाई के मूड में नजर आ रही थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को बुधवार को अचानक दिल्ली तलब करने के भाजपा आलाकमान के फैसले के बाद से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर भाजपा आलाकमान कोई बड़ा फैसला ले सकती है। स्वतंत्र देव सिंह के अयोध्या दौरे को बीच में ही छोड़कर विशेष विमान से दिल्ली जाने के बाद अटकलों का बाजार गर्म था। लोग उन वजहों को तलाशने में जुटे थे कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि उन्हें दिल्ली तलब किया गया है। राजनीति को पंडितों ने कयास लगा लिया था कि स्वतंत्र देव को अचानक दिल्ली बुलाने का अहम कारण उन्नाव दुष्कर्म कांड का मुद्दा है। उन्हें अयोध्या दौरे को बीच में ही छोड़ कर दिल्ली जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट में उन्नाव मामले की सुनवाई के बीच भाजपा ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाल दिया है।

गौरतलब है कि दुष्कर्म पीड़िता के राबयरेली में सड़क दुर्घटना में रविवार को गंभीर रूप से घायल होने के बाद एक बार फिर सूबे की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार और भाजपा पर हमलावर रहे। मामला गरमाने के बाद स्वतंत्र देव सिंह ने यह कहा था कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पिछले साल ही पार्टी से निलाबित कर दिया गया था। इस निर्णय की किसी को भी सूचना नहीं थी।कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सेंगर के भाजपा में बने रहने पर सवाल उठाया। बुधवार को कांग्रेसियों ने कुलदीप सिंह सेंगर की बर्खास्तगी के लिए प्रदेश भर में एक दिन का उपवास रखा। दिल्ली महिला अध्यक्ष स्वाति मालीवाल भी कुलदीप सिंह सेंगर की बर्खास्तगी की मांग कर चुकी हैं। इतना ही नहीं सपा और बसपा भी लगातार सरकार को घेर रहे। कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव जिले की बांगरमऊ विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए। कुलदीप सिंह सेंगर पर वर्ष 2017 में नाबालिग लड़की ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़ित लड़की के मुताबिक न सिर्फ विधायक बल्कि उनके कई गुर्गों ने भी उससे दुष्कर्म किया था।

दबंग कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव की तीन विधानसभा सीट से विधायक

मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले कुलदीप सिंह सेंगर की माखी गांव में तूती बोलती है। उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक पर उनका ननिहाल है। कुलदीप सिंह सेंगर परिवार के साथ यहीं आकर बस गए। कुलदीप सेंगर ने यूथ कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरूआत की थी। उन्नाव के अलग विधानसभा सीटों से तीन अलग दल से चुनाव लड़कर लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। सेंगर 2002 में उन्नाव सदर से बसपा के टिकट पर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2007 बांगरमऊ से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक बने। 2012 वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर ही भगवंतनगर से विधायक बने। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर 2017 में सेंगर बांगरमऊ से विधायक बने।

दुष्कर्म पीड़िता की सुरक्षा में तैनात रहे तीनों पुलिस कर्मी निलंबित

दुष्कर्म पीड़िता की कार से हुए हादसे के बाद जिन पुलिस कर्मियों को एसपी सहित डीजीपी ने क्लीन चिट दे दी थी, उनको आज निलंबित कर दिया गया। पीड़िता की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों में कांस्टेबल सुदेश कुमार (गनर), महिला आरक्षी रूबी पटेल व सुनीता देवी को पीड़िता की सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित होने के चलते निलम्बित किया गया है। हादसे के दूसरे दिन तक पुलिस अधिकारी ये कहते हुए तीनों का बचाव करते रहे कि पीड़िता ने खुद उन सभी को कार में जगह न होने की बात बोल कर ले जाने से इनकार कर दिया था। हालांकि प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) द्वारा ये खुलासा किया गया था कि सुरक्षा में तैनात किसी सुरक्षा कर्मी द्वारा ये सूचना नहीं दी गई कि पीड़िता ने उनको साथ ले जाने से मना कर दिया था, जबकि नियमानुसार सुरक्षा घेरे में रहने वाला व्यक्ति सुरक्षा लेने से इनकार करता है तो तैनात पुलिस कर्मी को तत्काल सूचना देनी होती है। फोन न मिलने की सूरत में नजदीक के थाने से वायरलेस के जरिये मैसेज देने की बाध्यता है, पर पीड़िता के मामले में इसको नजरअंदाज कर दिया गया।

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