दोस्त दिल से दिल बहुत मुश्किल से मिलते है.तू मेरा हम दम है

मन की बात न्यूज स्पेशल के साथ ,पढ़े फ्रेंडशिप डे पर अयूब रजा की बात

दोस्ती सच्ची हो तो वक्त रुक जाता है, आसमां लाख ऊंचा हो झुक जाता है.दोस्ती में दुनिया बने लाख रुकावट, अगर दोस्ती सच्ची तो खुदा भी झुक जाता है.परिवार से दूर जब दोस्त के रूप में रिश्ते जुड़ते हैं,तो दिल से एक ही बात निकलती है कि दिल से दिल मुश्किल से मिलते हैं,तूफानों में साहिल मुश्किल से मिलते हैं.यूं तो मिल जाता है, हर कोई मगर, आप जैसा दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलता हम दोस्त रहेंगे,दुनिया जले तो जले मैं दोस्ती पर इतना ही कहूंगा कि रिश्ता बनाओ तो आंखों और पलकों जैसा,जब आंखों में कुछ चला जाए तो पलकें तड़प उठती हैं और जब पलकें कुछ देर न झपके तो आंखें रो पड़ती हैं.उन सभी की दोस्ती बचपन की है. दूर चाहे जितना भी रहें पर दिल के काफी करीब हैं रिश्ते तो रिश्ते,जितना समझो,उतना समझते समझ नहीं पाया अगर दोस्त , दोस्त का दर्द ,क्या हक़ है कहलाए वो , दोस्त ,मीत ,हमदर्द मैं तेरा दोस्त ,तू मेरा हमदम तेरे दिल में ये दर्द सा क्या है मुझसे कहदे तू सोचता क्या है मैं तेरा दोस्त हूँ , तू मेरा हमदम ग़म न बांटें तो फ़ायदा क्या है मुझको समझा है गर कभी अपना मुझसे शरमाना नही सोचना क्या है अब रुलाने लगा है ग़म तेरा हाले-दिल तू बता ,हुआ क्या है साथ हो दोस्त ,फिर जहां क्या है क्या है तक़दीर , फिर ख़ुदा क्या है दोस्त ही दोस्त को न समझे फिर बदनसीबी या हादसा क्या है दोस्त ख़ुश हो जहां भी हो ,रब्बा और अयूब मांगता क्या है..

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