सारण एमएलसी सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खुला पत्र,सूरत अग्निकांड का उठाया मुद्दा

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

सारण एमएलसी सच्चिदानंद राय ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खुला पत्र,सूरत अग्निकांड का उठाया मुद्दा

पूज्य प्रधानमंत्री जी,

सर्वप्रथम आपको और समस्त भारतवासियों को इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए हृदय की गहराई से आभार एवम ढेर सारी बधाइयां।

अब मैं महोदय का ध्यान सूरत में हुए उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं, जिसमें दर्जनों युवाओं की अग्निकाण्ड में मृत्यु हो गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के लिए सूरत नगरपालिका पूरी तरह से जिम्मेवार हैं। जहां ऐसी भीड़ एकत्रित होती है वहां के अग्निशमन सुविधाओं का निरीक्षण नगरपालिका के दायित्व में शामिल है। अतः नगरपालिका के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर तो कार्यवाई होनी ही चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।

महोदय, यदि दूसरी तरफ आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि इतनी मौतों का मुख्य कारण अग्निशमन सेवा का देर से पहुंचना, बहुत बड़ी मात्रा में भीड़ का एकत्रित होना एवम भीड़ का सटीक नियंत्रण ना होना रहा है।

मैं सोचता हूं कि एनसीसी की तरह ही देश में हमें युवा छात्रों के बीच से, अर्थात कॉलेजों और हाई स्कूलों से, साधारण स्वयंसेवक तैयार करना चाहिए जिन्हें भीड़ नियंत्रण की विधा, यातायात नियंत्रण की विधा ताकी एंबुलेंस व फायर सर्विसेज ससमय पहुंच सकें, इन विधाओं में पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाये। इस प्रकार का एक बड़ा सामाजिक आंदोलन समाज के प्रति संवेदनशीलता का सृजन भी करेगा।

यदि हम अमेरिका का एक दृष्टान्त देखें तो पाएंगे कि ऐसी सेवाएं अधिकांश स्वयंसेवक संस्थाओं द्वारा चलाई जाती हैं। न्यू जर्सी के निवासी मेरे एक मित्र, वीवीएस प्रसाद, ने बताया कि उनका 16 वर्षीय पुत्र एक प्रशिक्षित जीवन रक्षक बन चुका है। उसका पुत्र सिद्धार्थ एवम उसके मित्र एम्बुलेंस, फायर ट्रक्स और जीवनरक्षक पद्धतियों के संचालन में प्रशिक्षित हैं। उस विद्यालय के प्रत्येक छात्र छात्रायें ऐसे कई सामाजिक दायित्व निभाने के लिए प्रशिक्षित हैं। ऐसी योजना आर्थिक, धार्मिक, जातिगत भावनाओं से परे समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का ऐसा सृजन करने में सहयोगी होती है, जिससे ये युवा एक दूसरे से दायित्व सूत्र से बंधे हुए महसूस करते हैं।

यह मेरी एक सोच मात्र है। हमें समझना होगा कि हर बार, हर बात सरकारों के लिए करना संभव नहीं हो सकता। सामाजिक दायित्व भी आवश्यक है। सामान्य नागरिकों के ऊपर कई नागरिक सुविधाओं की जिम्मेवारी उनके कंधों पर डालने का समय अब आ गया है। वरना 135 करोड़ और बढ़ती आबादी वाले देश में हर कार्य सरकारों पर छोड़ना ऐसी दुर्घटनाओं को बार-बार आमंत्रित करने में सहयोगी होगा।

सच्चिदानन्द राय
सदस्य, बिहार विधान परिषद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *